बिहार में मदरसा बोर्ड को आवंटित सरकारी धन की लूट….किसकी शह पर ?

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मदरसा हदिसिया ग्राम-बिहनगर,पंचायत-बिरोल,प्रखंड-पंडोल,जिला-मधुबनी,बिहार- जिसका नंबर 791 और 1974 में मंजूर हुआ बिहार सरकार के माध्यम से उसका भुगतान 1982 से शुरु हुआ. यह मदरसा फोकानिया तक है. इस मदरसे की विशेषता यह है कि इस मदरसे की कमेटी का ग्रामीण लोगों को कुछ पता नहीं है. उसके मुख्य मौलवी का आतंक इतना है कि उस गाँव की जनता बेचारी डर के मारे उनके इन करतूतों को किसी से कह भी नहीं सकती और मौलवी साहब इस मदरसे में भ्रष्टाचार को पूरा पनाह दिए हुए है. फर्जी विद्यार्थियों की सूची बनाकर सरकार की तिजोरी में सेंध लगाकर माल हड़प कर रहे हैं. जबकि उन विद्यार्थियों का नाम अन्य शिक्षा संस्थानों मे भी है. उनकी इस कारगुजारी को फलने फूलने का पूरा अवसर वहाँ की ग्राम पंचायत के मुखिया,ब्लाक विकास अधिकारी(बीडीओ) और ब्लाक शिक्षा अधिकारी(बीईओ) दे रहे हैं. मौलवी साहब तो बड़े अभिमान से कहते हैं कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, हमारा लिंक पटना तक है, सबको हम उनका हिस्सा पहुंचाते हैं.

मदरसा इस्लाहुल बनात,ग्राम-बिहनगर,पंचायत-बिरोल,प्रखंड-पंडोल,जिला-मधुबनी,बिहार- इस मदरसे की विशेषता- यह मदरसा पॉकेट में है, इसका भवन अज्ञात है, इसमें विद्यार्थियों का कुछ पता नहीं है, इसकी कमिटी अज्ञात है परन्तु इसे जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष अस्तित्व में लाया गया. जिला शिक्षा अधिकारी की मिलीभगत से उस गाँव में १९७४ से चल रहे मदरसा हदिसिया के भवन में लगा बोर्ड हटाकर उसकी जगह पर मदरसा इस्लाहुल बनात का बोर्ड लगाया गया. उसमें विद्यार्थियों की व्यवस्था प्राथमिक मख्तब के हेडमास्टर को मिलाकर किया गया.

मदरसा हदिसिया से लगभग आधा किलोमीटर से भी कम उसी ग्राम में एक नए मदरसे को भी इसी तर्ज पर अस्तित्व में लाया गया है. जबकि नियम के तहत तीन किलोमीटर की दूरी आवश्यक है, तभी नए मदरसे को मंजूरी मिल सकती है.

इस सारे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए प्रति मदरसा तीन लाख (300000) रुपये जिला शिक्षा अधिकारी और चेयरमैन द्वारा लिया जाता है और बिहार राज्य को आर्थिक रूप से नंगा किया जा रहा है. इसमें माननीय मुख्यमंत्री महोदय की छवि खराब की जा रही है जो कि अति निंदनीय है. माननीय महोदय से निवेदन है कि गुप्त रूप से इसकी जांच करके सम्बंधित भ्रष्ट लोगों की काली करतूतों का पर्दाफ़ाश कर उनको सख्त से सख्त सजा दिया जाए. ये तो मात्र एक उदाहरण है. फर्जीवाड़े का ऐसा नंगा नाच और भी कई गांवो में चल  रहे हैं (जैसे पास के गाँव मौजे डभारी,पंचायत संकुर्थ अंचल पंडोल और गाँव संगी टोले बारा घोघरडीहा,गाँव बरहमपुर थाना फुलपरास) जिसका सीधा असर राज्य की तिजोरी पर एवम राज्य के मुखिया पर पड़ रहा है.

मैं तो इस बात से भी हैरान हूँ कि वहाँ की मीडिया क्या कर रही है? सोई है या फिर सजग है. क्योंकि मीडिया चाहे तो बहुत कुछ कर सकती है जिसका जीता जागता उदाहरण हाल ही में पूरे देश ने देखा है कि दिल्ली की कुर्सी हिल गए थी.

-महेंद्र सिंह गहरवार (09321542800)

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