यूपी का दबंग कौन “मामू” या “दादू “

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चुनाव होने को है। सभी के जुवान पर एक सवाल है की इस बार का ताज किसको मीलेगा। खैर वही दूसरा सवाल है की इस बार क्या दागी भी विधान सभा पहुचेगे या नहीं वैसे दलीले बहूत दी जा रही है की पार्टिया दागी को जिताने में आगे नहीं आएगी । वही इसकी दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है । जितने दागी और दबंग  किस्म के प्रत्याशी है वह अपने जितने की पूरी तैयारी  में है । कहा ये भी जा रहा है की इस बार मुकाबले मायावती और मुलायम की पार्टी से है । तो क्या “मामू” को सत्ता मिल सकती है । “दादू “का मतलब दागी और दबंग । जरा देखिये दबंगो की लिस्ट उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में  कम-से-कम 69 उम्मीदवार ऐसे हैं, जो सलाखों के पीछे से अपनी सियासी बिसात बिछा रहे हैं। इस मामले में राज्य का पूर्वांचल इलाका सबसे आगे है। क्षेत्र के मतदाताओं के सामने इस बार चुनौती यह होगी कि वे चुनें भी तो किसे चुनें। कुछ विधानसभा सीटें तो ऐसी हैं, जहां लोगों को बाहुबली उम्मीदवारों में से ही किसी एक को चुनना होगा।

मुन्ना बजरंगी, बृजेश सिंह, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे आपराधिक पृष्ठभूमि के बहुत से उम्मीदवार इस बार भी चुनाव मैदान में हैं। चंदौली की सैयदराजा सीट से बृजेश सिंह प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं। बृजेश सिंह इस समय जेल में हैं, इसलिए उसके प्रचार का जिम्मा सहयोगियों ने संभाल रखा है। बृजेश सिंह पकड़ी नरसंहार से लेकर मुंबई के जे. जे. हत्याकांड में भी आरोपी हैं। अपराध की दुनिया का एक और कुख्यात नाम प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी अपना दल के टिकट पर जौनपुर की मडियाहू विधानसभा क्षेत्र से मैदान में हैं। बजरंगी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय सहित 10 से ज्यादा लोगों की हत्या का आरोप है। बजरंगी फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं, लेकिन समर्थक विधानसभा क्षेत्र में जोर-शोर से प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। अपना दल से एक और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार अतीक अहमद इस विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जो दर्जनभर मामलों में आरोपी हैं। आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के बारे में पूछे जाने पर अपना दल की महासचिव अनुप्रिया पटेल ने कहा, ‘कोई व्यक्ति अपराधी है या नहीं यह तय करना अदालत का काम है, हमारा नहीं।’ मुख्तार अंसारी भी अपराध की दुनिया का एक बड़ा नाम है, जो सियासी चोला पहनने में पहले ही कामयाब रहा है।

इस बार भी वह मऊ से कौमी एकता दल के उम्मीदवार हैं। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के अलावा उनके खिलाफ भी कई दर्जन मामले चल रहे हैं और फिलहाल वह जेल में हैं। कई अन्य माफिया भी चुनावी समर में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीएसपी सरकार के मंत्री नंदगोपाल नंदी पर जानलेवा हमला करने के आरोपी भदोही के विधायक विजय मिश्र को समाजवादी पार्टी (एसपी) ने एक बार फिर टिकट दिया है। कई मामलों में जेल जा चुके पूर्व विधायक गुड्डू पंडित को भी एसपी ने डिबाई विधानसभा से टिकट दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न की अनदेखी करते हुए प्रेम नारायण पांडे को तरबगंज विधानसभा से उम्मीदवार बनाया है। पांडे पर तो बीजेपी के ही जिलाध्यक्ष की हत्या कराने और पार्टी के कई पदाधिकारियों पर जानलेवा हमले करवाने का आरोप है। ‘ नैशनल इलेक्शन वॉच’ की ओर से पिछले दिनों जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की राजनीतिक पार्टियों ने अब तक 617 प्रत्याशियों की घोषणा की है, जिनमें कम से कम 77 उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और डकैती जैसे संगीन आरोप हैं।

संतोष पाण्डेय की रिपोर्ट
mob: 9410367337
{ आकंडे navbharattimes से लिए गए है}

साभार:तरंग भारत

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